Friday, 22 January 2016

यह कैसा इंडिया का पेटेंट एंड कॉपीराइट एक्ट (IPR. Act .)? जहाँ खुलेआम टेक्नॉलजी  चोर कर रहे कमाई व खा रहे मलाई.और रिसर्चरस (inventors) को हाथ लग रही रुसवाई, और कहीं नही है सुनवाई। 

2 comments:

  1. Registration Number : PMOPG/E/2016/0365510
    Name Of Complainant : RAJENDER KUMAR NANGIA
    Date of Receipt : 26 Sep 2016
    Received by : Prime Ministers Office
    Officer name : Shri Ambuj Sharma
    Officer Designation : Under Secretary (Public)
    Contact Address : Public Wing
    5th Floor, Rail Bhawan
    New Delhi110011
    Contact Number : 011-23386447
    e-mail : ambuj.sharma38@nic.in
    Grievance Description : आदरणीय प्रधान मंत्री जी नमस्कार, आपने पेटेंट एक्ट में सुधार किया उसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद, मैं आपकी नॉलिज में यह लाना चाहता हूँ कि दो प्रकार के लोग रिसर्च करते हैं, एक तो वह जो जिनको अपनी टैकनोलजी को अनसे से मार्किट करना है. और दूसरे वह होते हैं जो सिर्फ रिसर्च करते हैं और दूसरे वह होते हैं जिनके पास मार्किटिंग का कोई बजट नही होता और वह फंडर या दूसरी कम्पनियों पर डिपैंड या सरकार पर डिपैंड होते हैं, जो अपनी टैकनोलजी को अपने से यूज करते हैं उनको कोई खास फर्क नही पड़ता की बाद में कोई उनके कॉम्पिटिशन में आ भी जाए तो क्योंकि वह पहले से ही अपनी मार्किट का दायरा बना लेते हैं. जो फंडर या दूसरों पर डिपैंड हैं, वह कई टैकनोलजी रिसर्च करते हैं और उनमें से कोई एक दो टैकनोलजीयां ही काम की निकलती हैं जिनसे उन्हें काफी उमीदें होती हैं, और उसे भी टैकनोलजी चोर बड़ी सफाई से चुरा लेते हैं। आई जानते हैं कि कैसे टैकनोलजी चोर काम करते हैं:- सबसे पहले फंडर या कोई भी उसी फिल्ड की कम्पनी के पास टैकनोलजी रिसर्च करने वाला पेटेंट एप्लिकेंट जाता है और उनसे हल्का फुल्का डिस्कशन करता है अगर टैकनोलजी चोर को टैकनोलजी समझ में आती है तो एप्लिकेंट से यह पूछा जाता है की तुमने इसका पेटेंट कब फ़ाइल किया और पेटेंट एप्लिकेशन नंबर क्या है, और एप्लिकेंट के साथ एक NDA साइन कर लेता है जिससे की एप्लिकेंट को भरोसा हो जाए की हम उसके साथ हैं, उसके बाद टैकनोलजी एप्लिकेंट धीरे - धीरे अपनी टैकनोलजी की इन्फॉर्मेंशन देता रहता है क्योंकि किसी भी नई टैकनोलजी को बनाने में काफी वक्त लगता है तो एक मीटिंग में टैकनोलजी की सभी जानकारियां देना संभव नही होता, जब तक टैकनोलजी चोर टैकनोलजी को अच्छे से नही समझ जाता तब तक वह एप्लिकेंट और टैकनोलजी की तारिफ करते थकते नही हैं और एप्लिकेंट बेचारा यह सोचता है की इनसे काम बन जाएगा।, जिस दिन टैकनोलजी चोर टैकनोलजी को पूर्णता समझ जाते हैं और अपने टैक्निकल इम्प्लॉई से ऐप्लिकेंट को अच्छे से टैकनोलजी समझवा देते हैं उसके बाद एप्लिकेंट से उतना वक्त माँगते हैं जितने वक्त में वह टैकनोलजी बन कर तैयार नही हो जाती और एप्लिकेंट इस उमीद से इंतजार करता है की जल्द ही उसे टैकनोलजी चोर कम्पनी से ऑफर आएगा इसी बीच जब टैकनोलजी चोर टैकनोलजी बनाने में कहीं अटक जाते हैं तो एप्लिकेंट को बुलवाते हैं और उससे उस प्रोब्लम का सल्यूशन बड़ी सफाई से माँगते हैं अगर इन्वेंटर को कोई डाउट होता है तो उसे टोकन भी दे देते हैं और एग्रीमेंट करने के लिए कंडीशन भी फ़ाइनल करने लगते हैं इससे एप्लिकेंट को कोई डाउट नही रहता और वह इन्फॉर्मेशन टैकनोलजी चोरों को दे देता है. और जब टैकनोलजी चोर उस टैकनोलजी को बना लेता है तो उसके बाद एप्लिकेंट उनको कॉल पर कॉल करता है और वह उसे टालते रहते हैं और एक दिन एप्लिकेंट को साफ मना कर देते हैं यह कह कर की अगर इस टैकनोलजी को हम मार्किट में ले आएँगे तो दूसरे को सेम टैकनोलजी लाने से कैसे रोक सकते हैं आपका तो अभी पेटेंट पैंडिंग हैं. इसे ग्रांट होने में तो कई वर्ष लग जाएंगे। और फिर एक फर्जी कम्पनी बना कर उसी टैकनोलजी को दूसरे से मार्किट करवाते हैं और फिर खुद से भी उस टेक्नॉलजी को मार्किट में ले आते हैं, और पूछने यह कहते हैं की अभी तुम्हार पेटेंट ग्रांट नही है इस लिए तुम किसी को रोक नही सकते। पहले दूसरों को इस टैकनोलजी के यूज से रोक कर दिखलाओ फिर हमें रोकने की बात करना, और एक रिसर्च का मनोबल इस प्रकार तो देते हैं. और उसके बाद वह इन्वेंटर कम एप्लिकेंट पेटेंट ग्रांट होने का इंतजार करता है, और दूसरी तरफ और बेहतर टैकनोलजी बनाने में लग जाता है और शोचता है की इस नई टैकनोलजी को मैं मार्किट करूँगा। इस बार भी टैकनोलजी चोर उस पर घात लगाए बैठे होते हैं और जैसे ही वह कोई नया पेटेंट फाइल करता है और उस टैकनोलजी को बनाने में और मार्किट करने के लिए टीम रखता है और जब तक टैकनोलजी बन कर तैयार होती है तब तक इस नई टैकनोलजी की पेटेंट एप्लिकेशन पब्लिश हो जाती है अगर किसी भी टैकनोलजी चोर की नॉलजी में यह टैकनोलजी समझ आ जाती है वह इस टैकनोलजी को चुराने के लिए उस कम्पनी के इम्प्लॉई तोड़ लेता है और उन इम्प्लॉई को अपनी दूसरी कम्पनी के माध्यम से इस प्रकार रखता है जिससे उसके ऊपर कोई लीगल ऐक्शन न हो सके और उस टैकनोलजी को भी चोरी कर लेता है।
    Current Status : RECEIVED THE GRIEVANCE

    ReplyDelete
  2. आइए जानते हैं टैकनोलजी चोर कैसे आपकी टैकनोलजी को आपके सामने बड़ी सफाई से चोरी कर लेते हैं ?

    ReplyDelete